वोह हमसफ़र था / Woh Humsafar Tha / Mohsin Naqvi

वोह हमसफ़र था मगर उस से हम-नवाई ना थी,
के धुप छाओं का आलम रहा, जुदाई ना थी,

अदावतें थीं, तग़ाफ़ुल था, रंजिशें थीं मगर,
बिचरने वाले मैं सब कुछ था मगर बेवफाई ना थी,

बिछड़ते वक़्त उन आँखों मैं थी हमारी ग़ज़ल,
ग़ज़ल भी वोह जो कभी किसी को सुनाई ना थी,

किसी पुकार रहा था वह डूबता हुआ दिन,
सदा तो आयी थी लेकिन कोई दुहाई ना थी,

कभी यह हाल कह दोनों मैं यक-दिली थी बोहोत,
कभी यह मरहला जैसे कह आशनाई ना थी !

मोहसिन नक़वी

ट्रांसलेशन : हरमीत सिद्धू

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1 Response to वोह हमसफ़र था / Woh Humsafar Tha / Mohsin Naqvi

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