Monthly Archives: November 2015

Punjabi / Multiple / Two Liners

ਕਿੰਨੇ ਹੀ ਰੰਗ -ਢੰਗ ਹੰਢਾ ਚੁਕੀ ਹੈ ਜ਼ਿੰਦਗੀ, ਪਰ ਜਿਸਨੂੰ ਰਹੇ ਉਡੀਕਦੇ ਉਹ ਮੌਸਮ ਤਾਂ ਆਯਾ ਹੀ ਨਹੀਂ ! … ਬੁੱਬੂ ਤੀਰ  ਜਰੂਰੀ ਨਹੀਂ ਕਿ ਮੰਜਿਲ ਮਿਲ ਜਾਏ, ਲੰਮੀਆਂ ਵਾਟਾਂ ਦੇ ਪਾਂਧੀ ਹੋਣਾ ਵੀ, ਕੋਈ ਛੋਟੀ ਗੱਲ ਨਹੀ !!   ਨਾ … Continue reading

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Hindi / Multiple / Two Liners

जो गुजर रही है गुज़ार लो, ना बुरा कहो ना गिला करो, जो तुम्हारा हाल है दोस्तों , वही सरे शहर का हाल है फिर बैठे बैठे वादा-इ-वस्ल उस ने कर लिया, फिर उठ खड़ा हुआ वही रोग इंतज़ार का … Continue reading

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Hindi / Multiple / Two Liners

शब्-इ-इंतज़ार की कश-म-कश न पूछ कैसे सहर हुई, कभी इक चिराग बुझा दिया कभी इक चिराग जला लिया – मजरूह सुल्तानपुरी सूना है उन्हें भी हवा लग गई, हवाओं के जो रुख बदलते रहे – बशीर बदर वो खुदा है … Continue reading

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