Hindi / Multiple / Two Liners

शब्-इ-इंतज़ार की कश-म-कश न पूछ कैसे सहर हुई,
कभी इक चिराग बुझा दिया कभी इक चिराग जला लिया – मजरूह सुल्तानपुरी

सूना है उन्हें भी हवा लग गई,
हवाओं के जो रुख बदलते रहे – बशीर बदर

वो खुदा है किसी टूटे हुए दिल में होगा,
मस्जिदों में उसे ढूँढो ना कलीसाओं में – क़तील

[कलीसा = चर्च]

भूल जाना भी तो इक तरह की नेहमत है फ़राज़,
वर्ण इंसान को पागल ना बना दे यादें – अहमद फ़राज़

अबके फ़राज़ वो हुआ जिसका ना था गुमान तक,
पहले सी दोस्ती तो क्या ख़तम है बोल चाल भी – अहमद फ़राज़

किस-किसका नाम लाऊँ ज़बान पर की तेरे साथ,
हर रोज़ एक शख्स नया देखता हूँ मैं – क़तील

कसम खुदा की खुदा भी साफ़ कहता है,
मेरा जवाब तू है .. तेरा कोई जवाब नहीं !

क्या करें ये दिल किसी की ना-सिहा सुनता ही नहीं,
आप ने जो कुछ कहा अय मोहतरमा, अपनी जगा – अहमद फ़राज़

कल जो था वो आज नहीं जो आज है कल मिट जाएगा,
रूखी सूखी जो मिल जाए शुक्र करो तो बेहतर है – नासिर

तुम गिराने में लगे थे तुमने सोचा ही नहीं,
मई गिरा तो मसला बन कर खड़ा हो जाऊँगा – वसीम बरेलवी

ट्रांसलेशन : हरमीत सिद्धू

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