Category Archives: Mohammad Iqbal Kasoori

सर झुकाया तो / Sar Jhukaya To / Mohammad Iqbal Kasoori

ले कर तुम्हारा नाम जहाँ सर झुका दिया, मैंने उसी दवार को काबा बना दिया, सर झुकाया तो पत्थर सनम बन गए, इश्क़ भटका तो हद आशना हो गया, रश्क करता है काबा मेरे कुफर पर, मैंने जिस बुत्त को … Continue reading

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